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8/03/2021

[PDF] 45 Second Mein Presentation Kaise De - Books Review And free pdf Download

 मल्टी-लेवल मार्केटिंग आज इस्तेमाल में आ रहे उत्पादों को बेचने का सबसे तेज़ तरीका है, लेकिन इसी को समझने में लोगों से सबसे ज़्यादा ग़लती होती है।

कई लोगों ने इसे 1990 दशक की सबसे बड़ी चीज़ घोषित किया है। हालाँकि मेरी बात का यक़ीन करें, यह इससे कहीं आगे की चीज़ है। 2010तक तो मल्टी - लेवल मार्केटिंग कंपनियाँ हर साल 200 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के उत्पाद और सेवाएँ बेचेंगी।


21वीं सदी में एमएलएम की प्रगति को ज़रा गौर से देखें! इस पुस्तक का उद्देश्य उदाहरणों के ज़रिये आपको, यानि पाठक को यह बताना है कि मल्टी - लेवल मार्केटिंग क्या है और क्या नहीं है। हम यह भी बताएँगे कि आप कैसे सफलतापूर्वक (मैं दोहराता हूँ सफलतापूर्वक) दूसरों को मल्टी - लेवल मार्केटिंग समझा सकते हैं।

वैसे इस पुस्तक को ट्रेनिंग मैन्युअल समझा जाना चाहिए। इसे एक औज़ार के रूप में तैयार किया गया है, ताकि इसका इस्तेमाल कर आप अपने संगठन के लोगों को प्रशिक्षण दे सकें। इस पुस्तक को अपने प्रोग्राम की जानकारी देने वाली प्रारंभिक "किट" में रखें। मैंने "नैपकिन प्रेजेंटेशन" 1973 में तैयार किए थे और यह पुस्तक उन्हीं पर आधारित है।

मैं 1969 से ही किसी न किसी तरह मल्टी - लेवल मार्केटिंग से जुड़ा रहा हूँ। इस पुस्तक में कुल मिलाकर 10 प्रेजेंटेशन हैं, जो अब तक तैयार किए गए हैं। "दस नैपकिन प्रेजेंटेशन " के विस्तृत विवरण में जाने से पहले मुझे उस एक सवाल का जवाब देने की अनुमति दें, जिसे सबसे ज़्यादा बार पूछा जाता है और जो शायद सबसे बुनियादी सवाल भी है।

45 Second Mein Presentation Kaise De

सवाल है : ये “एमएलएम क्या है ?" हम अपने शर्ट पर जो बटन लगाते हैं, उसकी प्रतिक्रिया में यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। इस पूरी पुस्तक में हम " एमएलएम " और " मल्टी - लेवल मार्कटिंग” का इस्तेमाल पर्यायवाची के रूप में करेंगे।

कई बार इस सूची में चौथे प्रकार की मार्केटिंग (चौथी अँगुली उठाएँ) को भी जोड़ दिया जाता है - मेल ऑर्डर। वैसे तो मेल ऑर्डर एमएलएम की श्रेणी में भी आ सकता है, लेकिन आम तौर पर इसे डायरेक्ट सेल्स की श्रेणी में शामिल किया जाता है। पाँचवाँ प्रकार वह है,

जिसमें और एमएलएम में प्राय : ग़लतफ़हमी देखी जाती है। यह है पिरामिड सेल्स और मैं इसका ज़िक्र पहले ही कर चुका हूँ। सच तो यह है कि पिरामिड गैर-कानूनी होते हैं ! उनके गैर - कानूनी होने का अहम कारण यह है कि वे किसी उत्पाद को उपभोक्ता तक नहीं पहुंचा पाते हैं या वैध सेवा प्रदान करने में असफल रहते हैं।

यदि कोई उत्पाद उपभोक्ता तक नहीं पहुँचता है, तो आप इसे "मार्केटिंग" कैसे कह सकते हैं, - " मल्टी लेवल मार्कटिंग " की बात तो छोड़ ही दें ! वैसे वे खुद को मल्टी- लेवल तो कह सकते हैं - लेकिन मार्केटिंग कभी नहीं !!!

मल्टी-लेवल मार्केटिंग से जुड़ने में लोगों की आपत्ति की सबसे बड़ी वजह यह है कि वे एमएलएम और डायरेक्ट सेल्स के अंतर को नहीं पहचान पाते हैं। यह दुविधा आसानी से उलझा सकती है, क्योंकि सबसे प्रतिष्ठित एमएलएम कंपनियाँ डायरेक्ट सेल्स असोसिएशन की सदस्य भी हैं।

शायद आपके मन में यह भर दिया गया है कि एमएलएम का मतलब है घर - घर जाकर सीधे बेचना, क्योंकि उनके साथ आपका पहला संपर्क तब हुआ था, जब किसी वितरक ने कोई सामान बेचने के लिए आपके घर का दरवाजा खटखटाया था।

कुछ बातें एमएलएम कंपनियों को रिटेल तथा डायरेक्ट सेल्स कंपनियों से अलग करती हैं। एक बहुत अहम अंतर यह है कि एमएलएम में आप अपने लिए बिज़नेस करते हैं- लेकिन अकेले नहीं करते।

यदि आप अपना खुद का बिज़नेस कर रहे हैं, खास तौर पर यदि घर से बिज़नेस कर रहे हैं, तो आपको टैक्स में अच्छी-खासी छूट मिल जाती है। वैसे मैं आपको इस पुस्तक में टैक्स के लाभों के बारे में नहीं बताऊँगा। यह जानकारी आप अपने अकाउंटेंट या इस विषय पर लिखी गई ढेरों पुस्तकों से प्राप्त कर सकते हैं।

जब आप खुद के लिए बिज़नेस करते हैं, तो आप जिस भी कंपनी के प्रतिनिधि हैं, उससे थोक में उत्पाद खरीदते हैं । इसका यह मतलब है कि आप उन सामानों का इस्तेमाल अपने खुद के उपभोग के लिए कर सकते हैं (और आपको ऐसा करना भी चाहिए। कई लोग तो इसी कारण पहले - पहल कंपनी के साथ जुड़ते हैं, क्योंकि वे थोक में खरीदना चाहते हैं। और उनमें से कई “गंभीर हो सकते हैं।


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