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8/12/2021

500+ Business Ideas - Books Review And Free Pdf Download

 

स्टार्टअप क्या है


स्टार्टअप का मतलब एक नई कंपनी से होता है।आमतौर पर उसको शुरू करने वाला व्यक्ति उसमें निवेश करने के साथ साथ कंपनी का संचालन भी करता है। 




स्टार्टअप कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स या सर्विस को लांच करती है, जो कि मार्केट में उपलब्ध नहीं होते है। जब आपके प्रोडक्ट्स या सर्विस से लोगो की लाइफ में चेंज या आसानी होती है तो देखते-देखते आपका स्टार्ट-अप उचाईया छूने लगता है

जैसे- स्नैपडील, ओला कैब्स, पेटीएम, फ्लिपकार्ट, ओयो रूम आदि। 


स्टार्टअप शुरू करना चाहते है तो पहले करें ये काम -


 आज के समय में युवाओं में खुद के बिजनेस को लेकर काफी उत्साह रहता है जिससे वे स्वरोजगार की ओर अधिक आर्कषित हो रहे हैं। 

अगर आप भी स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो आप कुछ बातो का ध्यान रख सकते है जैसेकिसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए सबसे पहले एक यूनिक और इनोवेटिव आइडिया की जरूरत होती है। 

बिजनेस को सफल बनाने के लिए प्लानिंग जरुरी है बिजनेस प्लान बनाएं जिससे आप आने वाले समय की रुरेखा तैयार करे तथा उस हिसाब से काम कर सके। 

कोई भी बिज़नेस शुरू करने से पहले मार्किट रिसर्च करे जिससे आपको बाजार में क्या चल रहा है सब पता हो। बिजनेस शुरू करते वक्त अपने स्टार्टअप के नाम का चयन करे और अगर आप अपने बिजनेस के नाम को भविष्य में एक बड़ा ब्रांड बनाना चाहते हैं

तो नाम छोटा और सरल सोचें। बिजनेस का एक मॉडल तैयार करें, कि आपका बिजनेस काम कैसे करेगा,क्या-क्या सर्विस आपको देनी है, लोगों को आपके बिजनेस से कितना फायदा मिलेगा आदि बाते तय कर ले। किसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए रजिस्टर कराना जरूरी है।

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स्टार्टअप में काम करने के फायदे

स्टार्टअप में काम करने के बहुत अलग-अलग फायदे होते है जैसे सिखने के लिए बहुत कुछ मिलता है। यहाँ पर कर्मचारी बिना किसी सुपरविशन के काम करते है

वो इसमें स्मार्ट फैसले लेते है और परिणामो के लिए तैयार रहते है जिससे उन्हें आगे बढ़ने के लिए मोटिवेशन मिलती है। यूनिक या नया एक्सपेरिसन्स प्राप्त होता है।

इसमें आपको अपना टैलेंट दिखाने का अवसर मिलता है और आपका आईडिया पसंद आने पर इंसेंटिव भी मिलता है । यहाँ काम करने पर अन्य सुविधाएं जैसे-कमचारियों को डिस्कोट्स और फ्री सर्विसेज,घर से काम करने की सुविधा,अच्छा वातावरण आदि।

स्टार्टअप में काम करने के नुकसान

सोशल लाइफ का कम होना। स्टार्टअप कंपनी शुरूआती समय में ज्यादा सैलरी नहीं देते है ये अन्य चीज़ो पर ज्यादा जोर देते है लेकिन अच्छी ग्रोथ होने पर आप अच्छी इनकम पा सकते है। स्टार्टअप फाउंडर के पास बहुत अच्छे आईडिया होते है जिससे वे बुनयादी पैसा जमा कर लेते है

लेकिन एक अनुभवी लीडर की कमी रहती है।


स्टार्टअप इंडिया स्कीम

स्टार्टअप इंडिया सरकार द्वारा लायी गयी योजना है जिसमे उद्योगों व व्यापार को बढ़ावा देना है। इसमें उन्हें उचित दामों पर लोन दिया जाता है जिससे वो ग्रो कर सके और सफलता पा सके।

स्टार्टअप इंडिया में टैक्स या कर छूट


स्टार्टअप्स में कारोबारियों को शुरू के तीन साल में इनकम टैक्स से पूरी छूट दी जाएगी।


स्टार्टअप इंडिया स्कीम के लाभ

स्टार्टअप इंडिया स्कीम से जुड़ना बहुत ही आसान प्रक्रिया है ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन द्वारा आप स्कीम से जुड़ सकते है। इस स्कीम में उद्यमी को कारोबार से जुडी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती है।

स्टार्टअप स्कीम में 1 अप्रैल 2016 के बाद रेजिस्टर हुई कंपनियों को अपने 3 साल ले टैक्स से छूट दी गयी है। भारत सरकार ने स्कूलो में स्टार्टअप संभंधित कार्यक्रम चालये जायेंगे जिसे ज्यादा से ज्यादा बच्चे इस स्कीम के बारे में जान सके।

स्टार्टअप इंडिया स्कीम के लिए योग्यता

स्टार्टअप इंडिया स्कीम में 5 वर्ष से अधिक पुरानी कंपनी को नहीं जोड़ा जायेगा। स्कीम के अंतर्गत आने आने वाली कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 25 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए।

प्राइवेट कंपनी या पार्टनरशिप फर्म या एलएलपी स्टार्टअप इंडिया स्कीम के अंतर्गत आएगी। स्टार्टअप कंपनी में नवीकरण और टेक्निक्स का अधिक यूज़ कर रहा हो। स्टार्टअप कंपनी का बिजनेस मॉडल रोजगार को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए।

स्टार्टअप इंडिया स्कीम के लिए आवेदन कैसे करे स्टार्टअप इंडिया स्कीम से जुड़ने के लिए उम्मीदवार इस स्कीम की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते है।

उसमे दी गयी सभी जानकारी को ध्यान से पढ़े और पहर फॉर्म फइलल कर सकते है। स्टार्टअप शुरू करने के लिए अन्य सहयोग स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरकार ने कई स्कीम चलायी है जिसमे नए उद्यमी उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और लोन भी प्रोवाइड कराया जा रहा है।


कम पूंजी से शुरू होने वाले बिज़नेस


आज के समय में सभी लोग पैसा कमाना चाहते है। कोई जॉब करना पसंद करते है, कोई अपना बिज़नेस करना चाहते है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन्वेस्टमेंट की होती है।


उनके पास किसी बिज़नेस को स्टार्ट करने के लिए प्रॉपर इन्वेस्टमेंट नहीं होती है। तो इस तरह आजकल व्यापार शुरू करने के लिए पैसो से ज्यादा सही विचार (Idea) और उसके सही इम्प्लेनेटशन की जरुरत होती है।


कुछ काम पूंजी से शुरू होने वाले बिज़नेस निम्न प्रकार


  1. अगरबत्ती बनाने का व्यापार Agarbatti Business,
  2. फूड बिज़नेस Food Business,
  3. हैंडीक्राफ्ट या हैंडमेड सामानHandcrafted or Handmade Accessories,
  4. फर्नीचर मैन्युफैक्चरिंग व्यापार Furniture Manufacturing Business,
  5. ई-कॉमर्स और इंटरनेट E-commerce and Intermet,
  6. बेबी कीपिंग सर्विस Baby Keeping Service,
  7. एप्लायंस रिपेयर सर्विस सेंटर Appliance Repair Service Center,
  8. मोबाइल फुड सर्विस Mobile Food Service,
  9. सेकंड हैंड प्रोडक्ट्स सेल Second Hand Products Sale,
  10. PET केयर सेंटर PET Care Center,
  11. फैशन बुटीक Fashion Boutique,
  12. इवेंट मैनजमेंट Event Management,
  13. कंसल्टेन्सी Consultancy,
  14. रेन वाटर हार्वेस्टिंग Rain Water Harvesting,
  15. कूरियर कंपनी Courier Company,
  16. ट्रांसलेशन का काम Translation Work,
  17. इंटीरियर डेकोरेशन वर्क Interior Decoration Work,
  18. गार्डनिंग सर्विस Gardening Service,
  19. मेडिकल टूर सर्विसेज Medical Tour Services,
  20. ऑटो मॉडिफिकेशन वर्क Auto Modification Work, 
  21. डाइटरी कंसल्टेंसी सर्विसेज Dietary Consultancy Services, 
  22. डांस कास Dance Class,
  23. पैकर्स एंड मोवेर्स वर्क Packers and Movers Work,
  24. कार पार्किंग Car Parking,
  25. स्पोर्ट्स कोचिंग Sports Coaching,
  26. ट्रेवल एजेंसी Travel Agency,
  27. रियल एस्टेट एजेंट Real Estate Agent,
  28. सेकंड हैंड कार डीलरशिप का काम Second Hand Car Dealership,
  29. मोबाइल गेराज सर्विसेज Mobile Garage Services,
  30. DJ साउंड सर्विस DJ Sound Service,
नोट-ऐसे ही कई अन्य शानदार बिज़नेस आईडिया के बारे में विस्तारपूर्वक जानने के लिए आप हमारी बुक की पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड कर सकते है


डाउनलोड पीडीऍफ़ - 500+ Business Ideas





1000 Baat Ki 1 Baat - Books Review And Free Pdf Download

101 SADABAHAR KAHANIYAN - Books Review And Free Pdf Download

365 दिन कैसे खुश रहें - Books Review And Free Pdf Download

1000 Baat Ki 1 Baat - Books Review And Free Pdf Download

 

यह पुस्तक आपको जीवन में आगे बढ़ने में सहायक सिद्ध हो, ऐसी मेरी आशा है। सुखद भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं 

पुस्तक के कुछ अंश & पुस्तक की पीडीऍफ़ फाइल सबसे निचे दी गयी है जिसे आप डाउनलोड कर सकते है 





मुझे बताओगे तो मैं भूल जाऊंगा। मुझे दिखाओगे, तो मुझे याद रहेगा मुझे शामिल कर लोगे तो मैं सीख लूंगा।

लोहे की छड़ जमीन पर यूं ही पडी रहे, तो वह सुई में तब्दील हो जाती है।
 
हम हमेशा यह नहीं कह सकते कि हर गलती किसी बेवकूफी का परिणाम है।
 
यदि आप असफल हो रहे हैं, तो यकीन मानिए कुदरत आपको बड़ी सफलता अर्जित करवाना चाहती है।
यदि कोई बेटा शिक्षित नहीं है, तो इसके लिए उसके पिता को ही दोष दिया जा सकता है।
जो घर में रहता है, वह बेहतर जानता है कि छत कहां से टपकती है।
जो अपने दुश्मनों के साथ सहमत नहीं होता, वह उनके द्वारा नियंत्रित होता है।
वह नांव, जो किनारे पर बांधी नहीं जाती, वह लहरों के साथ बह जाती है।
जब तक नदी को पार ना कर लो, तब तक मगरमच्छ को अपमानित ना करो।
 
आप जहां पर भी हैं वहीं से शुरुआत कीजिए। आपके पास जो भी उपलब्ध है उसका उपयोग कीजिए। जो कुछ भी आप कर सकते हैं वह कीजिए।
ठंडी चाय और ठंडे चावल बर्दाश्त किए जा सकते हैं लेकिन रूखा और ठंडा व्यवहार तथा कड़वे शब्द बर्दाश्त नहीं किये जाते।
ईश्वर से प्रार्थना अवश्य कीजिए लेकिन पतवार चलाना ना छोड़िए।

यदि आप खुद को भरना चाहते हैं तो सबसे पहले खुद को खाली कीजिए।

उपयुक्त लोगों के साथ गहरी बातचीत अनमोल है।

यदि आप अपने दिमाग पर नियंत्रण नहीं करोगे तो कोई दूसरा करेगा।

जिंदगी में जब भी आप सभी चीजों की जिम्मेदारी ले लेते हैं. उसी वक्त आप में यह ताकत आ जाती है कि आप जिंदगी को बदल सकते हैं।

 

जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम बहुत जल्दी बूढ़े हो जाते हैं और बहुत देरी रो समझदार होते हैं।



जब कोई भला व्यक्ति अपना धैर्य खो देता है तो शैतान की रूह भी कांप जाती है।


आने वाला कल उन्हीं का है, जो दूर दृष्टि रखते हैं।


अगर आप खुद पर विजय पाने में कामयाब हो जाते हैं तो आप दुनिया पर भी विजय पा सकते हैं।


एक बुद्धिमान व्यक्ति उससे कहीं अधिक अवसर निर्मित कर लेता है, जितने अवसर उसे मिलते हैं।


थोड़ी सी जल्दबाजी भी पूरी योजना का सत्यानाश कर सकती है।।


सिर्फ बोलने से ही चावल नहीं पकते।

 

जो आदमी जिंदगी में छोटे झटके बर्दाश्त नहीं कर सकता, वह बड़ी सफलताएं अर्जित नहीं कर सकता।


धीरे चलने से घबराने की जरूरत नहीं है। घबराने की जरूरत है, यदि आप एक ही स्थान पर खड़े रहते हैं तो।


एक ऐसा हीरा जिसमें दाग हैं, उस पत्थर से बेहतर है जो बिल्कुल साफ है।


अंधेरे को कोसने से बेहतर है कि मोमबत्ती जला ली जाए।


एक इंसान उस वक्त सबसे अधिक थका हुआ महसूस करता है, जब वह एक ही स्थान पर खड़ा रहता है और तरक्की नहीं करता।


आपको एक कुआं खोद लेना चाहिए इससे पहले कि आप को प्यास लगे।


आप सब को खुश नहीं कर सकते और अगर आप ऐसी कोई कोशिश कर रहे हैं तो आप की हार निश्चित है।


आप की सफलताएं उपलब्धियां कोई मायने नहीं रखती क्योंकि जब आप मत्य शैया पर होते हैं तो उस वक्त आप अपनी सुनहरी यादें ही मायने रखती हैं।

 

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8/09/2021

101 SADABAHAR KAHANIYAN - Books Review And Free Pdf Download


कहानी 1


सच क्या?


यह काफी पुरानी कहानी है। प्राचीन युग में भारत में जनक नाम के एक मशहूर राजा हुए थे, यह उन्हीं की कहानी है।

उनका सीधा परिचय दिया जाए तो वे भारत के लोकप्रिय ग्रंथ रामायण की नायिका माता सीता के पिता थे।


वे शुरू से धर्म के बहुत बड़े खोजी थे, सो दिन-दिनभर दरबार में धर्म चर्चा आयोजित किया करते थे। एक रात उन्होंने बड़ा ही विचित्र सपना देखा।





उन्होंने देखा कि एक शक्तिशाली राजा ने उनके राज्य पे हमला कर दिया और पूरा राज्य तहस-नहस कर दिया। यहां तक कि उन्हें जान बचाने हेतु दूर जंगलों में भाग जाना पड़ा। अब अकेली जान, घना जंगल, युद्ध और भागदौड़ की थकान, हार की मायसी और उस पर भूखा ...


अब इस घने जंगल में मिले क्या? कई दिन इस तरह बिताने के बाद एक दिन उनके हाल पे तरस खाकर एक राहगीर ने उन्हें एक रोटी दी। अभी वे एक पेड़ के नीचे बैठकर रोटी खाने को ही थे कि एक विशाल कौआ झपट्टा मार रोटी ले उड़ा। यह देख जनक चीख पड़े, और चीखते ही उनकी नींद उड़ गई।


नींद उड़ते ही उन्होंने अपने को अपने ही राजमहल के बिस्तर पर पसीने से लथपथ पाया। यह देख जनक विचारशुन्य हो गए। चूंकि वे धार्मिक चिंतन के व्यक्ति थे,सो उनके सोच की सूई यहां अटक गई कि सपना देख रहा था तब मैं पड़ा तो अपने बिस्तर पर ही था, लेकिन मन पूरी तरह जंगलों में भटक गया था।


दौड़ा-भागी हुई ही थी, कौआ रोटी ले ही उड़ा था, मैं चीखा भी था और पसीने से लथपथ भी हुआ ही था। ...सवाल यह कि उस समय पुरता सत्य क्या था? मैं बिस्तर पर लेटा था वह सत्य था, या मैं युद्ध हार के जंगलों में भटक रहा था; वह सत्य था?

अब सवाल तो जायज था,


परंतु इसका उत्तर क्या? बस जनक उस क्षण से ही इसका उत्तर ढूंढने में दूब गए। इसके अलावा उन्हें और किसी बात का होश ही नहीं रह गया था। वे दिन-रात दरबार में धार्मिक धुरंधरों को बुलाकर सवाल पूछा करते थे कि “यह सच या वह सच"। उनकी यह हालत देख परिवारवाले, मंत्री व अन्य सभी परेशान हो उठे थे।


उनका काफी इलाज भी करवाया पर कोई फर्क नहीं आया। उधर धार्मिक धुरंधर भी उनकी जिज्ञासा का कोई समाधान नहीं कर पा रहे थे। यह खबर उड़ती-उड़ती उस समय के परमज्ञानी अष्टावक्र के कानों तक पहुंची। वे तुरंत जनक के दरबार में पहुंच गए। स्वाभाविक तौरपर जनक ने अष्टावक्र से भी वही सवाल दोहराया।


अष्टावक्र ने तुरंत हंसते हुए कहा- महाराज! न यह सच-न वह सच।जनक तो चौंक गए। ...क्योंकि अब तक जितने भी लोगों ने बताया था, उन्होंने जनक की एक या दूसरी अवस्था को सच बताया था। खैर, इस हालत में जनक चौके.


यह भी उनकी वर्तमान दशा के लिए बड़ी उपलब्धि थी। उधर अष्टावक्र ने अपनी बात विस्तार से समझाते हुए जनक से कहा- देखो, जब सपना देख रहे थे तब भी तुम पड़े तो अपने राजमहल में ही थे, अर्थात् उस समय तुम्हारा जंगलों में भटकना गलत हो ही गया।


ठीक वैसे ही तुम सोचो कि वास्तव में तुम राजमहल में थे तो भी उस समय तुम्हारा चित्त तो जंगलों में ही भटक रहा था; अत: उस समय तुम्हारा राजमहल में होना भी गलत ही हो गया।

 

जनक को बात तो समझ में आ गई, लेकिन फिर उनकी जिज्ञासा ने एक नई उड़ान पकड़ी। उन्होंने अष्टावक्र से हाथोंहाथ पूछा- तो फिर सच क्या है?

 

अष्टावक्र बोले- सत्य तुम्हारा द्रष्टा है जो यह दोनों घटना देख रहा था। उसे इन दोनों में से किसी से कोई मतलब नहीं था।

जनक की तो यह सुनते ही आंख खुल गई। उन्हें तो जैसे जीवन की दिशा ही मिल गई।

 

अब तो उन्होंने जीवन का एक ही मकसद बना लिया कि चाहे जो हो जाए, मृत्यु पूर्व द्रष्टा का एहसास करना ही है। और, बाद में अष्टावक्र ने एक गुरु की तरह जनक को उनके द्रष्टा में स्थित भी किया। यह बातचीत 'अष्टावक्र गीता' के नाम से बहुत मशहूर भी है।

 

सार:- बस हमें भी मानसिक ऊंचाइयां छूने हेतु जनक की तरह जिज्ञासु होना ही पड़ेगा। पूरा न सही, परंतु धीरे-धीरेकर अपने द्रष्टा होने का एहसास जगाना ही पड़ेगा। यह समझना ही पड़ेगा कि दुख-सुख, ऊंच-नीच, साजोसामान, रिश्तेदार, दोस्त और दुश्मन ही नहीं, हमारे अपने भावों के उतार-चढ़ाव भी हमारे लिए 'अन्य' ही

 

हैं। हम तो उन सबको सिर्फ देखनेवाले हैं। हम उनमें से कुछ नहीं। इसलिए वास्तविकता तो यह है कि अंदर बाहर की ऐसी कोई घटना नहीं, जो हमें प्रभावित कर सके।

 



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8/05/2021

[पीडीऍफ़] 365 दिन कैसे खुश रहें - Books Review And Free Pdf Download

दोस्तो! इस पुस्तक को लिखने से पहले मैं विभिन्न उम्र, व्यवसाय, क्षेत्र तथा विभिन्न राज्यों के हजारों लोगों से मिला और उनसे बातचीत की। उनके खुश रहने के कारणों के बारे में जानकारी मालूम की।

लोगों के खुश रहने के अपने-अपने तरीके हैंकोई कहता है, 'जब मैं दो बालटी गरम पानी से नहा लेता हूँ तो मुझे खुशी मिलती है।' 'जब मुझे अपने दोस्तों के मेसेज मिलते हैं, मुझे अपार खुशी मिलती है।' जब कोई कहती है, 'मैं काफी सुंदर लग रही हूँ, यह सुनकर मुझे खुशी होती है।




' 'जब मेरे पापा मुझे अपनी बाइक चलाने के लिए कहते हैं तो मैं खुशी से उछल पड़ता हूँ।' 'जब टीचर कहते हैं कि कल क्लास नहीं है, उस दिन मेरी खशी का ठिकाना ही नहीं रहता है।'

मैंने लोगों को उन बातों की सूची बनाने के लिए कहा, जिस चीज को प्राप्त करने के बाद उन्हें सबसे अधिक खुशी मिलती है। सबसे अधिक आश्चर्य तो तब हुआ, जब लोग खुशी की सूची बनाते हुए परेशान दिखे। उनकी खुशी की सूची एक-दो बातों से लंबी नहीं रही थी। इसका मतलब यह निकलता है कि लोग खुशी की तलाश नहीं करते हैं,

इसलिए उन्हें यह पता ही नहीं है कि किस बात में ज्यादा खुशी मिलती है। खुशी की बजाय उन्हें दुःख देने या परेशान करनेवाली बातों की सूची बनाने के लिए कहा तो उन्होंने दु:खी करनेवाली बातों की लंबी सूची तैयार करके दे दी।


लोगों की खुशी की सूची को पढ़कर आपको उसमें खुश रहने की प्रेरणा नहीं मिलेगी; बल्कि आप उन बातों को सुनकर आश्चर्य में पड़ सकते हैं कि क्या लोगों को ऐसी बातों में भी खुशी मिल सकती है!


मुंबई के गोरेगाँव में रहनेवाले, प्रिंटिंग प्रेस का कारोबार देखनेवाले एक महाशय ने खुशी की सूची में लिखा-'मेरा कुत्ता जब मेरे सामने दुम हिलाता है तो मेरा दिल खुशियों से झूम उठता है।' दिल्ली के रहनेवाले एक व्यवसायी का कहना था, 'लोगों के फटे जूते देखकर उन्हें खुशी मिलती है।'


इलाहाबाद के एक युवक ने कहा, 'आसमान में छाए बादलों के समूह को देखकर मुझे अपार प्रसन्नता होती है।' पटना के रहनेवाले तथा नागपुर में पढ़ाई करनेवाले एक छात्र ने सूची में लिखा-'बिल्डिंग की लिफ्ट में चढ़नेउतरने में बड़ी खुशी मिलती है।'


सप्ताह यानी सातों दिन हर किसी के लिए अलग-अलग तरह की खुशियाँ लाते हैं। अनेक छात्रों के लिए रविवार बड़ी खुशी का दिन होता है। वहीं अनेक छात्र इसे सबसे बोरियत भरा दिन मानते हैं। कुछ लोग रिटायरमेंट को खुशियों से भरा मानते हैं, कुछ रिटायरमेंट को दु:खों की गठरी मिलना बताते हैं।


कानपुर में रहनेवाली सुरेखा कहती हैं, 'मैं जब आईने के सामने खड़ी होती हूँ तो अपने आपसे बात कर मुझे अपार खुशी होती है। दिल्ली की मंजू कहती हैं, 'मुझे जब कोई अच्छा सा कमेंट देता है, मुझे खुशी मिलती है।' पटना की रहनेवाली लेखिका पूजा का कहना है, 'जब मेरी रचनाएँ कहीं छपती हैं या स्वीकृति-पत्र मिलता है, तब मुझे खुशी मिलती है।' नागपुर की 22 वर्षीया सारिका फिल्म की शौकीन हैं। उनका कहना है, 'जब मैं फर्स्ट शो फिल्म देखती हूँ, तब मुझे खुशी मिलती है।' ऐसी अनेक बातें हैं, जिसे पाकर लोग खुश रहते हैं।



भरपूर खुशी मिलने पर लोग सुध-बुध खो देते हैं। उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं होता है कि वे किस हालत में हैं। आर्कमिडीज का सिद्धांत खोजनेवाले वैज्ञानिक आर्कमिडीज अपने सारे कपड़े उतारकर एक दिन बॉथ टब में नहा रहे थे। जैसे ही वे टब में घुसे, उसमें से कुछ पानी छलककर बाहर आ गया।

 

उन्होंने अपने सिद्धांत को पकड़ लिया। टब से निकलकर वे तुरंत अपनी प्रयोगशाला की ओर भागने लगे। उस वक्त उनके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। वे चिल्लाते जा रहे थे–'यूरेका, यूरेका!'-यानी मिल गया, मिल गया।

 

क्रिकेट मैच के दौरान मंदिरा बेदी इतनी उत्साह में थीं कि उन्हें अपने कपड़ों का होश ही नहीं रहा। इसका सीधा प्रसारण टी.वी. के माध्यम से पूरी दुनिया में होता रहा। इससे मंदिरा को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह अपनी खुशी को लेकर ही व्यस्त थीं।

जिन लोगों को खुश रहने की आदत होती है, वे हर हाल में खुश रहते हैं। इसीलिए तो लोग जहाँ कहीं भी रहते हैं -हिमालय की बर्फवाली पहाड़ी पर या समुद्र के किनारे, सुदूर जंगल में या रेगिस्तान में उन्हें वहाँ रहने की मजबूरी है, यह बात नहीं। वे वहाँ खुश हैं, इसलिए वहाँ रहते हैं।

 

ओशो के अनसार, 'सच्ची खशी वह नहीं है, जो हम चाहते हैं। एक पल की खुशी दूसरे पल दु:खों की सौगात भी बन सकती है। जब हम खुश होते हैं, तब हमारे मन के किसी कोने में उसके खत्म होने का डर भी होता है।'

 

रुपया, पैसा, प्रसिद्धि भी बहुत ज्यादा खुशियाँ दे दें, ऐसा नहीं होता। एक लॉटरी पानेवाला जिंदगी भर खश नहीं रह सकता। कुछ ही सालों में उसे खुशियों की तलाश करनी ही पड़ती है, क्योंकि खुशियाँ उसके जीवन से गायब हो चुकी होती हैं। सिर्फ पैसों की वजह से लोग खुश हो जाएँ, ऐसा नहीं है। उनका जीवन भी तनावों से भरा होता है। सबकुछ होने के बाद भी वे आत्महत्या करने जैसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं।

 

जो हमेशा हँसता है, वह दुनिया का सबसे खुश व्यक्ति हो, ऐसा नहीं कह सकते। एक हैरान-परेशान व्यक्ति एक मनोचिकित्सक के पास गया। उसने अपनी ढेर सारी परेशानियाँ डॉक्टर को बताई और खुश रहने के उपाय के लिए सलाह माँगी।

 

डॉक्टर ने मरीज की पूरी बात सुनकर कहा, "सामने खिड़की से बाहर शहर का नजारा देख रहे हो?" मरीज ने कहा, "देख रहा हूँ।" "इसमें कोई खास बात नजर आ रही है?" "नहीं, ऐसी कोई खास बात नजर नहीं आ रही है।"

"क्या आपको पता है, इन दिनों शहर में सर्कस आया हुआ है? सर्कस ने शहर के लोगों के मन में खुशियाँ भर दी हैं।" मरीज ने आश्चर्य से पूछा, "वह कैसे?"

 

"लगता है, तुमने अभी तक सर्कस नहीं देखा है। एक काम करो, आज शाम तुम सर्कस देखने के लिए जाओ। उस सर्कस में एक दुबला-पतला, मरियल सा जोकर है, जो अपने कारनामों से लोगों को हँसा-हँसाकर लोट-पोट कर देता है। जब तुम उसे देखोगे तो तुम्हें उससे खुश रहने की प्रेरणा मिलेगी।" "डॉक्टर, ऐसा नहीं हो सकता।" "क्यों?" डॉक्टर ने आश्चर्य से पूछा।

 

"डॉक्टर साहब, उस सर्कस का जोकर मैं ही हूँ।"

चेहरे पर हँसी और मुसकान को देखकर खुशी को परिभाषित नहीं किया जा सकता है। खुशी चेहरे पर नहीं, अंतर की गहराई में होती है। जो चेहरे पर झलके, यह जरूरी नहीं है। उन सबके खुश रहने की बातों को जानकर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि खुश रहने का कोई फॉर्मूला नहीं होता। लोग अपने आप में खुश रहते हैं।

 

किसे किस बात में खुशी मिलेगी, यह कहा नहीं जा सकता। वे खुद भी सही-सही नहीं बता सकते हैं कि उन्हें किस बात पर खुशी मिलेगी।

 

हर कोई अपने आप में खुश रहता है या अपने आप में दु:खी रहता है। खुश रहने का लोगों का अपना-अपना सिद्धांत है, अपना-अपना तरीका है, अपना-अपना विचार है। हर किसी का सिद्धांत, विचार या तरीका दूसरे से मेल खा जाए, ऐसा हमेशा संभव नहीं है।

 

उनकी बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि खुश रहना अपने हाथ में है। किसी को बड़ी उपलब्धि पर खुशी मिलती है तो किसी को छोटी उपलब्धि पर बड़ी खुशी मिलती है। कोई छोटी बात पर बहुत खुश हो जाता है, कोई बड़ी बात पर भी खुश नहीं हो पाता है। यानी जो जिस बात में अधिक खुशी ढूँढ़ता है, वह उतना ही अधिक खुश होता है। जो कम खुशी ढूँढ़ता है, वह कम खुश रहता है।

 

अंत में इतना कहना चाहूँगा, एक मटका आग में तपने के बाद ही हर किसी को ठंडा पानी दे सकता है। बाँसुरी गरम छड़ को बरदाश्त कर अपने अंदर से संगीत की मीठी तान निकाल सकती है।

 

खुशियाँ दिखाई नहीं देती, महसूस की जाती हैं। खुशियाँ हमारे आस-पास ही बिखरी पड़ी हैं। बस, उन्हें समेटने की जरूरत है, सुनहरे पलों में कैद करने की जरूरत है। हम अगर छोटे-छोटे पहलुओं में खुशियाँ ढूँढें तो हमारे पास दु:ख नाम की चीज नहीं रह जाएगी।

 

 







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