This Blog about to Book review and free pdf download on one click

Showing posts with label Hindi Ebooks. Show all posts
Showing posts with label Hindi Ebooks. Show all posts

8/03/2021

[PDF] 100 Great Business Ideas Hindi eBook - Books Review And free pdf Download

 अध्याय 1: ग्राहक विश्वास और निष्ठा का निर्माण करना

बेचना और प्रभावित करना(selling and influencing) दोनों एक ही गलत धारणा से ग्रस्त हैं कि सफलता के लिए आपको आक्रामक रूप से या चतुराई से किसी उत्पाद या विचार को आगे बढ़ाने की आवश्यकता होती है। यह गलतफहमी अनुचित व्यवहार की ओर ले जाती है। उदाहरण के लिए, लोग उइंड, "दबाव डालने वाले," और आक्रामक हो सकते हैं,





या अत्यधिक बातूनी और सहमत हो सकते हैं। बिक्री और प्रभावित करना, व्यवहार को सही पाने पर निर्भर करता है, जो गर्मजोशी और सक्षमता के साथ खुलेपन और मुखरता को नियंत्रित करता है। एक महान उत्पाद या ब्रांड के साथ संयुक्त, यह ग्राहक वफादारी के निर्माण के लिए एक लंबा रास्ता तय करता है।


विचार हार्ले-डेविडसन ने सबसे स्थायी संपत्ति में से एक ग्राहक निष्ठा(customer loyalty) का निर्माण करके एक अशांत अतीत पर काबू पा लिया। यह अमेरिका के सबसे अग्रणी मोटरबाइक निर्माताओं में से एक था, लेकिन 1980 के दशक तक, सस्ती, उच्च गुणवत्ता वाली जापानी मशीनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद बिक्री में नाटकीय रूप से गिरावट आई।


हार्ले-डेविडसन ने डॉ. डब्ल्यू. एडवर्ड्स डेमिंग की उत्पादन तकनीकों का उपयोग करके गुणवत्ता में सुधार किया। अगली चुनौती वापस जीतना और बाजार में हिस्सेदारी बनाए रखना था, (अब यह ग्राहक की 90 प्रतिशत की वफादारी(loyalty) दर प्राप्त करता है)।


ग्राहकों की जरूरतों का ज्ञान और ग्राहकों की भावनाओं के लिए अपील करने से हार्ले-डेविडसन को ग्राहकों के साथ विश्वास और बंधन बनाने में मदद मिली। उनके प्रबंधक रैलियों में नियमित रूप से ग्राहकों से मिलते हैं, जहाँ नए मॉडल प्रदर्शित किए जाते हैं। विज्ञापन ग्राहक की वफादारी को बढ़ावा देने के लिए, ब्रांड की छवि को मजबूत करता है।


हार्ले ओनर्स ग्रुप (HOG) एक सदस्यता क्लब है जो ग्राहकों की वफादारी में प्रवेश करता है, जिसमें दो-तिहाई ग्राहक सदस्यता को नवीनीकृत करते हैं।


100 Great Business Ideas Hindi eBook

गौरतलब है कि हार्ले-डेविडसन ग्राहकों को उन लाभों को प्राप्त करने के लिए सुनिश्चित करता है, जिनका उन्हें मूल्य है। परिणाम यह है कि ग्राहकों को हार्ले-डेविडसन पर भरोसा है; इस ट्रस्ट का उपयोग एक मजबूत चक्र में मजबूत बांड और अधिक से अधिक लाभ विकसित करने के लिए किया जाता है।


रिच टेर्लिंक, पूर्व अध्यक्ष, ने टिप्पणी की, "शायद सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम था-और जारी है-हार्ले ओनर्स ग्रुप (HOG)......डीलर्स को विश्वास था कि हार्ले एक भरोसेमंद साथी होगा [और] हार्ले में हमारे लोगों-सभी लोगों के विचारों को पकड़ना-हमारी भविष्य की सफलता के लिए महत्वपूर्ण था।


" अभ्यास में • ग्राहकों को अपने व्यवसाय से सौदा करने के लिए हर बार एक सुसंगत (और आदर्श रूप से एक "ब्रांडेड") अनुभव प्रदान करें। • मूल्य प्रस्ताव के बारे में स्पष्ट रहें-आप ग्राहकों को क्या दे रहे हैं। • नए ग्राहकों को वापस लौटने और reorder करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करें।


• स्थापित(established) ग्राहकों के लिए पुरस्कार की वफादारी। • प्रतिस्पर्धी बनें-आपके लिए एक अच्छा सौदा जैसा लगता है कि आप अपने प्रतिस्पर्धियों से मेल नहीं खा सकते हैं। • ग्राहक के अनुभव को यथासंभव आसान और सुखद बनाएं। • विश्वसनीय सेवा और उत्पाद की पेशकश के साथ ग्राहकों को आश्वस्त करें।


[PDF] 45 Second Mein Presentation Kaise De - Books Review And free pdf Download

 मल्टी-लेवल मार्केटिंग आज इस्तेमाल में आ रहे उत्पादों को बेचने का सबसे तेज़ तरीका है, लेकिन इसी को समझने में लोगों से सबसे ज़्यादा ग़लती होती है।

कई लोगों ने इसे 1990 दशक की सबसे बड़ी चीज़ घोषित किया है। हालाँकि मेरी बात का यक़ीन करें, यह इससे कहीं आगे की चीज़ है। 2010तक तो मल्टी - लेवल मार्केटिंग कंपनियाँ हर साल 200 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के उत्पाद और सेवाएँ बेचेंगी।


21वीं सदी में एमएलएम की प्रगति को ज़रा गौर से देखें! इस पुस्तक का उद्देश्य उदाहरणों के ज़रिये आपको, यानि पाठक को यह बताना है कि मल्टी - लेवल मार्केटिंग क्या है और क्या नहीं है। हम यह भी बताएँगे कि आप कैसे सफलतापूर्वक (मैं दोहराता हूँ सफलतापूर्वक) दूसरों को मल्टी - लेवल मार्केटिंग समझा सकते हैं।

वैसे इस पुस्तक को ट्रेनिंग मैन्युअल समझा जाना चाहिए। इसे एक औज़ार के रूप में तैयार किया गया है, ताकि इसका इस्तेमाल कर आप अपने संगठन के लोगों को प्रशिक्षण दे सकें। इस पुस्तक को अपने प्रोग्राम की जानकारी देने वाली प्रारंभिक "किट" में रखें। मैंने "नैपकिन प्रेजेंटेशन" 1973 में तैयार किए थे और यह पुस्तक उन्हीं पर आधारित है।

मैं 1969 से ही किसी न किसी तरह मल्टी - लेवल मार्केटिंग से जुड़ा रहा हूँ। इस पुस्तक में कुल मिलाकर 10 प्रेजेंटेशन हैं, जो अब तक तैयार किए गए हैं। "दस नैपकिन प्रेजेंटेशन " के विस्तृत विवरण में जाने से पहले मुझे उस एक सवाल का जवाब देने की अनुमति दें, जिसे सबसे ज़्यादा बार पूछा जाता है और जो शायद सबसे बुनियादी सवाल भी है।

45 Second Mein Presentation Kaise De

सवाल है : ये “एमएलएम क्या है ?" हम अपने शर्ट पर जो बटन लगाते हैं, उसकी प्रतिक्रिया में यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। इस पूरी पुस्तक में हम " एमएलएम " और " मल्टी - लेवल मार्कटिंग” का इस्तेमाल पर्यायवाची के रूप में करेंगे।

कई बार इस सूची में चौथे प्रकार की मार्केटिंग (चौथी अँगुली उठाएँ) को भी जोड़ दिया जाता है - मेल ऑर्डर। वैसे तो मेल ऑर्डर एमएलएम की श्रेणी में भी आ सकता है, लेकिन आम तौर पर इसे डायरेक्ट सेल्स की श्रेणी में शामिल किया जाता है। पाँचवाँ प्रकार वह है,

जिसमें और एमएलएम में प्राय : ग़लतफ़हमी देखी जाती है। यह है पिरामिड सेल्स और मैं इसका ज़िक्र पहले ही कर चुका हूँ। सच तो यह है कि पिरामिड गैर-कानूनी होते हैं ! उनके गैर - कानूनी होने का अहम कारण यह है कि वे किसी उत्पाद को उपभोक्ता तक नहीं पहुंचा पाते हैं या वैध सेवा प्रदान करने में असफल रहते हैं।

यदि कोई उत्पाद उपभोक्ता तक नहीं पहुँचता है, तो आप इसे "मार्केटिंग" कैसे कह सकते हैं, - " मल्टी लेवल मार्कटिंग " की बात तो छोड़ ही दें ! वैसे वे खुद को मल्टी- लेवल तो कह सकते हैं - लेकिन मार्केटिंग कभी नहीं !!!

मल्टी-लेवल मार्केटिंग से जुड़ने में लोगों की आपत्ति की सबसे बड़ी वजह यह है कि वे एमएलएम और डायरेक्ट सेल्स के अंतर को नहीं पहचान पाते हैं। यह दुविधा आसानी से उलझा सकती है, क्योंकि सबसे प्रतिष्ठित एमएलएम कंपनियाँ डायरेक्ट सेल्स असोसिएशन की सदस्य भी हैं।

शायद आपके मन में यह भर दिया गया है कि एमएलएम का मतलब है घर - घर जाकर सीधे बेचना, क्योंकि उनके साथ आपका पहला संपर्क तब हुआ था, जब किसी वितरक ने कोई सामान बेचने के लिए आपके घर का दरवाजा खटखटाया था।

कुछ बातें एमएलएम कंपनियों को रिटेल तथा डायरेक्ट सेल्स कंपनियों से अलग करती हैं। एक बहुत अहम अंतर यह है कि एमएलएम में आप अपने लिए बिज़नेस करते हैं- लेकिन अकेले नहीं करते।

यदि आप अपना खुद का बिज़नेस कर रहे हैं, खास तौर पर यदि घर से बिज़नेस कर रहे हैं, तो आपको टैक्स में अच्छी-खासी छूट मिल जाती है। वैसे मैं आपको इस पुस्तक में टैक्स के लाभों के बारे में नहीं बताऊँगा। यह जानकारी आप अपने अकाउंटेंट या इस विषय पर लिखी गई ढेरों पुस्तकों से प्राप्त कर सकते हैं।

जब आप खुद के लिए बिज़नेस करते हैं, तो आप जिस भी कंपनी के प्रतिनिधि हैं, उससे थोक में उत्पाद खरीदते हैं । इसका यह मतलब है कि आप उन सामानों का इस्तेमाल अपने खुद के उपभोग के लिए कर सकते हैं (और आपको ऐसा करना भी चाहिए। कई लोग तो इसी कारण पहले - पहल कंपनी के साथ जुड़ते हैं, क्योंकि वे थोक में खरीदना चाहते हैं। और उनमें से कई “गंभीर हो सकते हैं।


PDF DOWNLOAD - 45 Second Mein Presentation Kaise De

[PDF] Change your Life in 24 Hours! - Books Review And free pdf Download


क्या महज़ 24 घंटों में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है? क्या एक ही दिन में जीवन बदलना संभव

है?


यह न सिर्फ संभव है, बल्कि मुमकिन भी है।


यह पुस्तक एक बहुत ही सरल अवधारणा पर केंद्रित है। हमारा मानना है कि जीवन में होने वाले बड़े परिवर्तनों के निर्णय लंबे समय में धीरे-धीरे नहीं लिए जाते हैं, वे तो चंद पलों के सचेतन निर्णयों का परिणाम होते हैं। हालाँकि, ये चुनाव जल्दबाज़ी में नहीं किए जाते हैं, बल्कि ये तो गहरी जड़ों वाले संकल्प होते हैं, जिनकी बदौलत आपके विचारों और कार्यों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं।



24 Hours To Change Your Life


मिसाल के तौर पर, हो सकता है कि आपका लक्ष्य डाइटिंग करके अपना वज़न बीस पौंड कम करना हो और इसमें छह महीने लग जाएँ। लेकिन सच तो यह है कि आपने यह युद्ध छह महीने में नहीं, बल्कि बहत कम समय में जीत लिया था- जिस घंटे आपने इस बात का सच्चा संकल्प किया था। यही प्रक्रिया उन सभी परिवर्तनों पर भी लागू होती है, जो हम अपने जीवन में चाहते हैं।


कायाकल्प की यह प्रक्रिया कब शुरू होगी? जिस पल आप बदलने का फ़ैसला करेंगे। हर परिवर्तन उस घंटे में होगा. जब आप अपने सामने मौजूद किसी बड़ी चुनौती का सामना करेंगे। इस पुस्तक में आपसे एक दृढ़ और व्यक्तिगत संकल्प करने को कहा जा रहा है।


यह पुस्तक इस तरह से तैयार नहीं की गई है कि इसे एक निश्चित समय सीमा में पढ़ना ज़रूरी हो। हम आपसे सिर्फ इतना चाहते हैं कि आप हर अध्याय पर एक घंटे का समय पूरी तरह से केंद्रित करें। इसे पढ़ें, इसके बारे में अच्छी तरह सोच-विचार करें और दिल की गहराई से निर्णय लें, जो परिवर्तन के लिए आवश्यक है।


 आइए देखते हैं कि इससे आपको क्या मिलेगा। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जब आप संकल्प लेंगे और समर्पित हो जाएँगे, तो ये निर्णय आपस में जुड़ते जाएँगे और आपको ऐसी अविश्वसनीय शक्ति मिलेगी,

जिसे आपने सपने में भी संभव नहीं माना होगा। इसका आपके काम-काज, आपके शरीरिक स्वास्थ्य, आपके व्यक्तिगत संबंधों और आपके पूरे नज़रिए पर सकारात्मक असर होगा।

Change your Life in 24 Hours!: Powerful Steps to Change Your Thought and Your Life


यह सारी प्रक्रिया कहाँ से शुरू होती है? किसी भी मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से पूछ लें; आपको एक ही जवाब मिलेगा : परिवर्तन के निर्णय के बिना कुछ भी नहीं होता है।


यह पुस्तक पढ़ते समय आपसे अपने विचारों, लक्ष्य, नज़रिए और आदतों के बारे में निर्णय लेने के लिए कहा जाएगा। लेकिन विशिष्ट परिवर्तनों के बारे में निर्णय लेना तब तक निरर्थक है, जब तक कि आप सबसे महत्वपूर्ण निर्णय न ले लें - परिवर्तन करने के लिए इच्छुक और तत्पर होने का निर्णय।


आप कह सकते हैं, “मैंने पहले भी कई बार इसकी कोशिश की है, लेकिन कुछ नहीं होता है।"

यही बात एक पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने की तीन असफल कोशिशों के बाद कह सकता था। लेकिन इसके बजाय उसने शिखर की ओर देखकर यह कहा, “तुमने मुझे एक बार हरा दिया। तुमने मुझे दो बार हरा दिया। तुमने मुझे तीन बार हरा दिया। लेकिन पहाड़, किसी दिन मैं तुम पर विजय पा लूँगा, क्योंकि तुम इससे ज़्यादा बड़े नहीं बन सकते हो, लेकिन मैं बन सकता हूँ।"


चाहे आप इसे जानते हों या नहीं, लेकिन हर चीज़ - जिसमें आपका शरीर भी शामिल है - परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया में रहती है। जब आप उसी पहाड़ पर दोबारा चढ़ते हैं, तो यह बिलकुल नया अनुभव होता है। प्राचीन यूनानी दार्शनिक हेराक्लिटस ने कहा था, “आप उसी नदी में दोबारा क़दम नहीं रख सकते।” नदी में पानी लगातार बहता रहता है और समुद्र में मिलता रहता है।






7/29/2021

[PDF] 21 Sucess Secrets of Self-Made Millionaires - Books Review And free pdf Download

 भूमिका

ये किताब 15 सालों के रिसर्च का नतीजा है जिसका विषय है स्वनिर्मित करोड़पति बनने के लिए शिक्षण और व्यक्तिगत अनुभव। इन पन्नों में पैसे जमा करने की कुछ महत्वपूर्ण सुझाव

और योजनायें हैं जो मैंने 100 किताबें और 1000 लेख पढ़ने के बाद खोजा है। ये सुझाव काफी सरल और प्रमाणित हैं और इसे काफी आसान तरीके से बताया गया है ताकि आप इसे पढ़कर, सीखकर तुरन्त लागू कर सकें।

21 Sucess Secrets of Self-Made Millionaires  - Books Review And free pdf Download


मेरी किशोरावस्था पोमोना (कैलिफोर्निया) में एक ऐसे घर में बीती जहाँ कभी बहुत पैसे नहीं थे। एक करोड़पति बनने का सपना, मेरा तब से है जब मैं 30 साल का था। मुझे विश्वास है कि बहुतों का ये सपना है।


जब मैं 30 का हआ, उस समय भी मैं उतना ही टा हआ था जितना 20 की उम्र में था। लेकिन तब मैंने कुछ ऐसा किया जिससे मेरा जीवन बदल गया। मैंने ये सवाल करना शुरू किया कि कुछ लोग ज़्यादा सफ़ल क्यों होते हैं? मुझे ये जानने की उत्सुकता थी कि कुछ नहीं से शुरू करके कुछ लोग करोड़पति कैसे बन जाते हैं।


इन सवालों के जवाब पर मैंने अन्वेषण करना शुरू किया और ये किताब उसका परिणाम है


मैंने स्वनिर्मित करोड़पतियों के अध्ययन को प्रमुख लक्ष्य बनाया क्योंकि इन लोगों ने कुछ ख़ास गुण और स्वभाव को परिभाषित किया है जो मापणीय और विचारयोग्य है। इन लोगों ने कुछ नहीं से शुरुआत करके करोड़ों रुपये बनाये। कुछ ख़ास चीज़ों को ख़ास तरीकों से किया।


जो मैंने सीखा वो था जीवन में महान सफ़लता के लिए आपको एक ख़ास तरह का इन्सान बनना होगा। भीड़ से हटने के लिए आपको अपने अन्दर गुण और अनुशासन लाना होगा जो आम इन्सान नहीं कर पाते।

जीवन में आर्थिक सफ़लता का सबसे महत्वपूर्ण तत्व पैसा नहीं है। आपको इन पैसों को कमाने के लिए किस तरह का इन्सान बनना है और फिर इसे सम्भालने के लिए क्या करना


जीवन के हर क्षेत्र में सफ़लता के लिए ये 21 रहस्यमयी सूत्र हैं। अच्छी ख़बर ये है कि ये सिद्धान्त इतने बलशाली हैं कि आप कुछ भी पाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें से बहुत-सी टेक्नीक और तरीके आपको जाने पहचाने लगेंगे। ये इसलिए क्योंकि इसकी खोज 100 सालों से हो रही है। मैं खुद को सफ़लता का विद्यार्थी मानता हूँ, एक पाठक, एक अन्वेषक, एक अध्यापक समझता हूँ। जैसा कि ऐक्लासियेटस में कहा गयासूरज के नीचे कुछ नया नहीं है, मैं इसे मानता हूँ।


चूँकि आप ये किताब पढ़ रहे हैं, मैं जानता हूँ कि आप जीवन में कुछ असाधारण चाहते हैं। आप अपनी क्षमता को जानिये। इनमें से हर रहस्य आपको एक बहुत अच्छे जीवन की ओर बहने में मदद करेगा। आप वो सब कुछ पायेंगे जो आप चाहते हैं। इस सफ़र का आनन्द लें।

परिचय : लॉ ऑफ़ कॉज़ एण्ड इफेक्ट

जो आप सीखने वाले हैं, उससे आपका जीवन बदल सकता है। ये सुझाव, निरीक्षण और कार्यनीति लाखों महिलाओं और पुरुषों के लिए आर्थिक सफ़लता में आगे बढ़ने की प्रेरणा रहे हैं। ये सिद्धान्त काफी सरल और लागू करने में आसान हैं। इन्हें बार-बार प्रमाणित किया जा चुका है। अगर आप इसे खुद के जीवन में इस्तेमाल करते हैं तो ये आपके लिए भी काम करेंगे।

 हमलोग मानव इतिहास के सबसे अच्छे समय में जी रहे हैं। अपनी कल्पना से भी परे आज बहुत से लोग शून्य से शुरू करके धनी हो रहे हैं। अमेरिका में 7 मिलियन करोड़पति हैं और उनमें से ज्यादातर स्वनिर्मित करोडपति। ये आंकडा 15 से 20 प्रतिशत की दर से हर साल बढ़ रहा है। यहाँ तक कि हमारे पास 10 स्वनिर्मित करोड़पति, 100 करोड़पति और 200 अरबपति हैं। इतिहास में हमने कभी इतनी सम्पत्ति एक साथ नहीं देखी।

यहाँ एक अच्छी ख़बर है। वास्तव में सभी शून्य से शुरुआत करते हैं। आज के 90 प्रतिशत से ज़्यादा आर्थिक रूप सफ़ल लोगों ने बहुत कम से शुरुआत की। औसतन स्वनिर्मित करोड़पति 3.2 बार दिवालिया हो चुके हैं।

ज़्यादातर धनी लोग सही मौका पाने और करोड़पति बनने से पहले बहुत बार असफ़ल होते हैं। जो हज़ारों-लाखों लोगों ने किया, आप भी कर सकते हैं।

इंसानी किस्मत का सबसे मज़बूत कानून है लॉ ऑफ़ कॉज़ एण्ड इफ़ेक्ट। ये बिल्कुल सहज है, किन्तु शक्तिशाली। ये कहता है कि हर वजह का एक ख़ास परिणाम होता है। हर एक्शन का रियेक्शन होता है। ये लॉ कहता है, सफ़लता कोई घटना नहीं है। आर्थिक सफ़लता उन कोशिशों का नतीजा होती है, जो आप बार-बार लक्ष्य हासिल होने तक करते है .


प्रकृति सबके लिए निष्पक्ष है। बाज़ार (मार्केट) या समाज को इस बात से कोई फ़र्क नहीं पडता कि आप कौन हैं, क्या हैं। लॉ ऑफ़ कॉज़ एण्ड इफ़ेक्ट कहता है अगर आप वो करते हैं जो अन्य सफ़ल लोगों ने किया है तो नतीजा आपको भी वो मिलेगा जो अन्य सफ़ल लोगों को मिला।

ये कानून कहता है जब आप स्वनिर्मित करोड़पति बनने के रहस्य सीखते हैं और इसे अपने जीवन में लागू करते हैं तो आपको उससे कहीं ज़्यादा परिणाम और ईनाम मिलेगा जितना आपने सोचा है।


यहाँ आपके याद रखने योग्य  एक और बात है। आपसे स्मार्ट और आपसे बेहतर कोई नहीं है। मुझे एक बार फिर दोहराने दीजिये। आपसे स्मार्ट और आपसे बेहतर कोई नहीं है।

 

Download PDF - 21 Sucess Secrets of Self-Made Millionaires




7/28/2021

[PDF] करोड़पतियों की आदतें - - Books Review And free pdf Download

 13 करोड़पतियों की आदतें जिन्होंने खुद ही सब कुछ हासिल कर लिया है


"यह दैनिक आदतें हैं जो आपको सफल या असफल व्यक्ति बनाती हैं," कॉर्ले अपनी पुस्तक में कहते हैं "अपनी आदतों को बदलें, अपना जीवन बदलें।" यह ऐसी आदतें हैं जो धन या गरीबी, खुशीया दुर्भाग्य, अच्छे या बुरे रिश्ते, अच्छे स्वास्थ्य का कारण बनती हैं या बीमारी। अच्छी खबर यह है कि आदतें लक्षण नहीं हैं और बदलना आसान है। जीवन भर, हम लगातार नई आदतों को प्राप्त करते हैं और खो देते हैं, आमतौर पर इसे ध्यान दिए बिना भी। लेकिन अगर आप एक उपयोगी कौशल को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आदत को सचेत और जल्दी से विकसित किया जा सकता है। किन सटीक आदतों को विकसित करने की आवश्यकता है? आप करोड़पतियों की 13 आदतों में पढ़ेंगे जिन्होंने खुद सब कुछ हासिल किया है।


1. वे बहुत पढ़ते हैं

88% अमीर लोग हर दिन कम से कम 30 मिनट पढ़ने में बिताते हैं। और पढ़ना मनोरंजक नहीं होना चाहिए। पढ़ना आवश्यक रूप से नया ज्ञान देना चाहिए। ये आमतौर पर पुस्तकों की तीन विधाएं होती हैं जिन्हें वे पढ़ते हैं - सफल लोगों की आत्मकथाएँ, स्व-विकास पर किताबें, या ऐतिहासिक रचनाएँ।



2. वे खेल खेलते हैं।

76% अमीर लोग रोजाना लगभग आधे घंटे व्यायाम करते हैं। ज्यादातर अक्सर यह कार्डियो-लोड होता है - जॉगिंग, चलना या साइकिल चलाना। इस तरह का भार न केवल शरीर के लिए, बल्कि मन के लिए भी उपयोगी है। इसका न्यूरॉन्स पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और ग्लूकोज के उत्पादन में योगदान देता है, जो मस्तिष्क के लिए एक उत्कृष्ट "ईंधन" है। जितना बेहतर हम अपने मस्तिष्क को "खिला "ते हैं, हम उतने ही अधिक होशियार होते हैं।




3. वे अन्य सफल लोगों के साथ समय बिताते हैं।

आप अपने आस-पास के लोगों की तरह सफल भी होते हैं। अमीर लोग उद्देश्यपूर्ण आशावादियों से निपटना पसंद करते हैं जो उत्साही हैं और दुनिया को सकारात्मक रूप से देखते हैं। नकारात्मक लोगों से बचना महत्वपूर्ण है। आप उनकी अनुचित आलोचना का शिकार होने का जोखिम उठाते हैं।



7/27/2021

[PDF] अच्छे मार्क पाने के 13 तरीके - Books Review And free pdf Download

 


1.विश्वास: स्वयं में विश्वास करना

2. भुला देना: पुराने पड़ चुके तरीकों को भुला देना

3. स्मार्ट: केवल कठोर मेहनत की जगह स्मार्ट तरीके से काम करना


विश्वास


अमेरिका के 26 वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने एक बार कहा था, 'विश्वास करो कि आप कर सकते हैं और आपका आधा काम हो जाएगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है। आपको यह विश्वास रखना होगा कि आप यह काम कर सकते हैं।





कहा जाता है कि एक बार एक आदमी ज्ञान की खोज में यूनान के दार्शनिक, साक्रतीज़ से मिलने गया। उसे आश्चर्य हुआ कि साक्रतीज़ उसे लेकर एक झील पर गए और उसका सिर पानी में डुबा दिया। वह व्यक्ति सास लेने के लिए बाहर आने की कोशिश करने लगा लेकिन साक्रतीज़ ने उसका सिर डुबोए रखा।


बाद में उस व्यक्ति ने साक्रतीज से पूछा कि उन्होंने उसे लगभग डबा क्यों दिया था, साक्रतीज़ ने जवाब दिया, जब तुम पानी के अंदर थे तो तुम्हें सबसे ज़्यादा किसकी ज़रूरत महसूस हुई? "हवा, उस व्यक्ति ने उत्तर दिया।


साक्रतीज़ ने कहा, 'जब ज्ञान पाने की तुम्हारी चाह इतनी बढ़ जाए जितनी की सांस लेने की थी, तो तुम्हें ज्ञान प्राप्त हो जाएगा।'


आप इस किताब को पढ़ रहे हैं इसका मतलब है कि आप बेहतर तरीके से पढ़ने के साथ ज्यादा अंक भी हासिल करना चाहते हैं। आपको यह ध्यान रखना होगा कि यह किताब कोई जादू की छड़ी नहीं है, यह तो आपको केवल एक रास्ता दिखा सकती है। लेकिन यह रास्ता आपको खुद ही तय करना होगा और बेहतर अंक पाने के लिए आपको लगातार मेहनत करनी होगी।


आप मेरा विश्वास करें। आपमें वह सब कुछ है जो आपको एक सर्वश्रेष्ठ छात्र बना सकता है। क्या आप ऐसा नहीं सोचते? क्या आपने श्रीकांत बोल्ला के बारे में सुना है?


श्रीकांत का जन्म आंध्रप्रदेश के एक गांव में हआ था। वे जन्म से ही देख नहीं सकते थे। पड़ोसियों ने उनके माता-पिता को सलाह दी कि वे श्रीकांत को जान से मार दें। लेकिन मात्र 20000 रुपए सालाना कमाने वाले उनके माता-पिता ने इस तरह की सलाहों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बहुत प्यार के साथ उनकी परवरिश की।


दृष्टिहीन और गरीब होने के कारण गांव के स्कूल में श्रीकांत को सबसे पीछे की बैंच पर बैठना पड़ता था। उन्हें दूसरे बच्चों के साथ खेलने की इजाज़त भी नहीं थी। उनके पिता ने उनका दाखिला हैदराबाद में विशेष बच्चों के लिए बने एक स्कूल में करवा दिया। यहां ना सिर्फ उन्होंने शतरंज और क्रिकेट खेलना सीखा बल्कि उसमें महारथ भी हासिल की। उन्होंने ना सिर्फ अपनी कक्षा में उच्च स्थान हासिल किया बल्कि उन्हें भूतपूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दल कलाम के लीड इंडिया प्रोजेक्ट में भी काम करने का मौका मिला।


उन्होंने 90% से भी ज्यादा अंकों से साथ अपनी दसवीं की परीक्षा पास की। लेकिन उनकी विकलांगता के कारण उन्हें विज्ञान के विषय में दाखिला नहीं मिला। श्रीकांत ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार सरकारी आदेश से उन्हें खुद की जोखिम' पर विज्ञान में दाखिला मिला। यहां तक की उन्होंने अपनी सभी किताबों को ऑडियो बुक में बदल लिया। उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि उन्हें 12वीं कक्षा में 98% अंक हासिल हुए।


आईआईटी, बिट्स और ऐसे कई दूसरे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों ने दृष्टिहीन होने के कारण उन्हें प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठने दिया। लेकिन श्रीकांत अमेरिका के प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (MIT) में दाखिला पाने वाले दुनिया के पहले दृष्टिहीन बने।


मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (MIT में पढ़ाई पूरी करने बाद उन्होंने अमेरिका में नौकरी के प्रस्तावों को ठकरा कर भारत वापस आने का फैसला किया। वह भारत वापस आकर रोजगार पैदा करने की दिशा में काम करना चाहते थे। आज श्रीकांत एक उद्यमी हैं। उनके चार कारखाने हैं जहां वे पर्यावरण


अनुकूल पैकेजिंग का सामान बनाते हैं। उनका एक पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाले संयंत्र जल्द ही आंध्रप्रदेश में चालू होने वाला है। उनके यहां काम करने वाले लोगों में 70% लोग विकलांग हैं और उनकी सालाना बिक्री 50 करोड़ रुपए को पार कर गई है।


श्रीकांत अपने निश्चय को दोहराते हुए कहते हैं: अगर दुनिया मुझे कहती है कि श्रीकांत तुम कुछ नहीं कर सकते तो मैं उसे पलट कर कहता हूं कि मैं कुछ भी कर सकता हूं।"


इंक एंड ग्रो रिच के लेखक नेपोलियन हिल ने कहा था, 'मनुष्य का दिमाग जो कुछ सोच सकता है और विश्वास कर सकता है, वह उन सब को हासिल कर सकता है।' आगे बढ़ते समय आपको भी इसी बात को ध्यान में रखना होगा कि आप जो चाहें हासिल कर सकते हैं। विश्वास के बिना कुछ हासिल नहीं होगा।


प्राचीन भारत में गुरु अपने शिष्यों से संकल्प लेने के लिए कहते थे। संस्कृत भाषा के इस शब्द का मतलब होता है एक विचार या संकल्पना जिसने आपके दिल और दिमाग में जगह बना ली है। यह कुछ हासिल करने की दृढ़ प्रतिज्ञा की तरह है। यह कुछ हासिल करने के लिए आपका लक्ष्य है। अब आपकी बारी है कि कुछ संकल्प लें और उसे पूरा कर दिखाएं।


भुला देना


अल्बर्ट आइंस्टाइन एक महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने मूर्खता को परिभाषित करते हुए कहा था, 'बार-बार एक ही काम को करते हए अलग परिणाम पाने की आशा रखना ही मूर्खता है। दर्भाग्य से पढ़ाई के समय अधिकतर लोग यही करते हैं। मेरी कोशिश है कि आप बार-बार जो गलती कर रहे हैं उसे रोका जाए।


चलिए मान लेते हैं कि आप कुछ नया सीखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए आप अधिकतर अंग्रेज़ी में लिखते हैं और उसके लिए रोमन लिपी का उपयोग करते हैं और अब आप नस्तालीक लिपी का इस्तेमाल कर उर्दू लिखना सीखना चाहते हैं। आपको बाई से दाई तरफ लिखने की आदत है लेकिन उर्दू के लिए आपको दाई से बाई तरफ लिखना होगा। साथ ही आपको नई वर्णमाल के अक्षर और लिखने के तरीके को भी सीखना होगा। एक तरह से देखें तो आपको बाई से दाई तरफ लिखने की अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति को छोड़ना होगा।


लेखक और भविष्यवेत्ता एलविन टोफलर ने कितनी सही बात कही थी, 21वीं सदी में अशिक्षित वे नहीं होंगे जो पढ़ना या लिखना नहीं जानते होंगे बल्कि वे होंगे जो सीखने, सीख कर भूल जाने और फिर से सीखने की कला को नहीं जानते होंगे।'


मैं आपको लिखने के एक बिल्कुल नए तरीके के बारे में बता रहा हूं। मैं चाहता हूं कि आप प्रभावी तरीके से पढ़ना सीखें जैसा कि आपने पहले कभी ना किया हो। नए तरीकों को सीखने के क्रम में आपको पढ़ाई के उन तरीकों को भूलना होगा जो अब तक आपके लिए बेहतर साबित नहीं हुए हैं।


स्मार्ट, नॉट हार्ड


हमारे साथ पढ़ने वाले बहुत से दोस्त ऐसे होते हैं जो सब कुछ आसानी से समझ लेते हैं। उनको शायद ही कभी पढ़ते देखा हो, उनके पास बहुत सा खाली समय होता है, उस समय में वे खेलते हैं, दोस्तों से मिलते हैं बातें करते हैं और इन सबके बावजूद उनके बहुत अच्छे अंक आते हैं। वे वह सब कैसे कर लेते हैं? इस किताब में मैं उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीकों के बारे में बताऊंगा।


आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि अगर ये तरीके इतने ही बेहतर हैं तो फिर इन्हें स्कूलों में क्यों नहीं सिखाया जाता? मैंने अधिकतर यही देखा है कि अध्यापक और माता-पिता बच्चों से हमेशा कड़ी मेहनत करने की बात करते हैं लेकिन यह मेहनत कैसे की जाए इस बारे में कोई कुछ नहीं बताता। बहुत मेहनत से पढ़ाई करने के बजाय स्मार्ट तरीके से कैसे पढ़ाई की जाए यही इस किताब में बताया जाएगा। मैं एक कहानी के जरिए दोनों के बीच का अंतर समझाता हूं।


एक बार एक राजा था जिसके तीन बच्चे थे। राजा बूढ़ा हो रहा था इसलिए उसने सोचा कि किसी बेटे को उत्तराधिकारी चुना जाए। उसने अपने तीनों बच्चों को बुलाया और उन्हें एक काम पूरा करने को कहा। उन तीनों में से हर एक को एक कमरा किसी एक चीज से इस तरह भरना था कि कमरे में कोई जगह खाली ना रहे। उन सभी को काम पूरा करने के लिए कुछ घंटों का समय दिया गया।


तीनों राजकुमार अपने-अपने कमरे को भरने की कोशिश में लग गए। पहले वाले ने अपने कमरे को पत्थरों से भरने का सोचा। उसने नौकरों को काम पूरा करने के लिए कहा लेकिन इस काम में बहुत मेहनत बहुत थी इसलिए उन्हें बहुत समय लग रहा था।


दूसरे राजकुमार ने कमरे को भूसे से भरने का सोचा। पत्थरों की तुलना में इसे उठाना आसान था। दूसरे राजकुमार ने दिए गए समय में पूरे कमरे को भर दिया। तीसरा राजकुमार किसी द्रव्य से भरी बोतल लाया और कमरे में चला गया। उसने कमरे की खिड़किया और दरवाजे बंद किए और द्रव्य को पूरे कमरे में छिड़क


PDF Download - 13 Steps to Bloody Good Marks - अच्छे मार्क पाने के 13 तरीके


7/26/2021

[PDF] 12th Fail - Books Review And free pdf Download

 मार्च की एक सुबह थी। रात भर मक्खियाँ कहीं दुबकी हुई थीं। पर उजाला होते ही फिर से भिनभिनाने लगीं। घर की छत पर सो रहे मनोज की नींद मक्खियों के बार बार भिनभिनाने से खुल गई।

उसका दोस्त विष्णु अपनी छत पर गणित के सवाल हल कर रहा था। गणित के सवाल तो मनोज को भी हल करने चाहिए, क्योंकि आज कक्षा बारह का पहला पेपर गणित का ही है, लेकिन उसे गणित के सवाल बिलकुल समझ नहीं आते। फिर भी उसने पास पड़ी गणित की किताब उठाई और पढ़ने की कोशिश करने लगा।


12th Fail  - Books Review And free pdf Download


लेकिन कुछ ही देर में वह समझ गया कि इस तरह किताब पकड़े रहने का कोई लाभ नहीं। मनोज अपनी तारीफ़ से बहुत उत्साहित होता है इसलिए जब उसने देखा कि उसके घर के सामने के कुँए पर मोहल्ले की महिलायें पानी भर रही हैं, तो उन्हें प्रभावित करने के लिये वह छत पर टहलते हुए गणित के सवाल ऊँची आवाज में पढने लगा। महिलाओं तक उसकी आवाज पहुँच गई। एक महिला उसकी तरफ इशारा करके बोली- "हमारो मोड़ा बिलकुल ना पढ़त। एक मनोज है, रात भर छत पेलालटेन से पढ़त रहतो।"

मनोज का उद्देश्य पूरा हुआ, अपनी तारीफ़ सुनकर वह खुश हो गया। उसने गणित की किताब नीचे रख दी और गुलशन नंदा का उपन्यास 'जलती चट्टान' खोल लिया। रात को एक बजे तक लालटेन की रोशनी में पढ़ने के बाद भी उसके क्लाइमेक्स के दो पेज रह गए थे।


उसने दस मिनिट में उपन्यास पूरा किया और बाहर कुँए पर आ गया। महिलायें अभी भी पानी भर रही थीं। एक बुजुर्ग महिला को कुँए से बाल्टी खीचने में बहुत कष्ट होता था। मनोज ने उसका कष्ट देखकर उसकी बाल्टी भर दी।


पुरस्कार में उसे महिला का आशीर्वाद प्राप्त हुआ - लल्ला तू फस्ट से पास होयगो।" तब तक उसके सहपाठी विष्णु के पिता पण्डित कालीचरण कुँए पर आ गये। गाँव के स्कूल में कक्षा आठ तक गणित पढ़ाने वाले पंडित कालीचरण मनोज और उसकी योग्यता को अच्छे से जानते थे। उसे देखते ही पण्डित जी बोल पड़े - "परीक्षा की तैयारी कैसी है मनोज? गणित में पास होना मजाक नहीं है।"


फिर पण्डित जी ने अपने बेटे विष्णु की तारीफ करना शुरु की - "मैंने तो विष्णु से कह दिया है कि फर्स्ट डिवीजन से पास नहीं हुआ तो मैं तो उसकी पढ़ाई बन्द करा दूंगा। पर मैं जानता हूँ विष्णु गणित में हुशियार है।


उसके मन में ही पढ़ने की लगन है। " मनोज इस सच्चाई को नकार नहीं सका। उसने पण्डित जी की मदद के उद्देश्य से उनके हाथ से पानी की बाल्टी ले ली और उनके साथ साथ चलने लगा। उसने पण्डितजी से उनके बेटे की तारीफ़ की - ताऊ विष्णु जैसा हुशियार लड़का तो पूरे जिले में नहीं है। मुझे तो पूरा भरोसा है कि वो इस बार जिले में फर्स्ट आयेगा।" यह कहते हुए मनोज की आँखों के सामने


उसके पिता की धुंधली छवि आई और फिर अचानक विलीन हो गई। हल्की टीस उदासी के रंग में उसके चेहरे पर दिखाई दी।


मुरैना जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर जौरा तहसील से सटे बिलग्राम में दिन की शुरुवात हो चुकी

थी। सामान्य सा यह दिन नया सिर्फ इस बात में था कि आज गाँव के कुछ लड़के लड़कियाँ ट्वेल्थ का पहला पेपर देने जा रहे थे। मनोज जब पण्डित जी को उनके घर छोड़कर वापस आया तो उसकी माँ अपने घर के दरवाजे पर दो महिलाओं के साथ बातचीत में मग्न थी।


मनोज द्वारा बुलाये जाने पर माँ ने इशारे से कह दिया -"रुक जा आती हूँ।" वह जानता था कि माँ से वार्तालाप जल्दी खत्म करके आने की उम्मीद करना व्यर्थ है।इसलिए वह तैयार होकर परीक्षा देने के लिए निकल गया। बेटे को तैयार होकर जाते हुए देख माँ देहरी पर बैठे बैठे बोली-"रुक जा मोड़ा,रजनी ने रोटी ना बनाई का? खाली पेट पेपर देबे मत जा।" माँ ने रोटी बनाने का काम पन्द्रह साल की बेटी रजनी को सौंप दिया था और खुद को चर्चाओं में व्यस्त कर लिया था। मनोज की भूख आज मर चुकी थी।


उसने गणित की गाइड हाथ में ले ली और बिना कुछ कहे घर से निकल गया। माँ फिर से चर्चा के काम में व्यस्त हो गई। यह गाँव तहसील को जिले से जोड़ने वाली सड़क के किनारे पर बसा था। इसलिए आवागमन की सुविधा से भाग्यशाली था।हर दस मिनिट में मुरैना से जौरा और जौरा से मुरैना आने जाने वाली बसें इस गाँव से गुजरती थी। सुबह के नौ बजे बिलग्राम की पुलिया पर सवारियों की भीड़ बढ़ने लगी। मनोज पुलिया के पास बने हनुमान जी के मन्दिर में हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। वह हनुमान जी की मूर्ति के सामने बुदबुदाया -“हे हनुमान जी गणित में बेड़ा पार लगा देना, तुम्हारा ही सहारा है।"



PDF Download -    12th Fail 


7/25/2021

[PDF] 12 Rules for Life - Books Review And free pdf Download

कुछ और नियम? वाकई? क्या हमारी अनूठी व्यक्तिगत स्थिति को ध्यान में न रखनेवाले ऐसे अमूर्त नियमों के बिना भी, हमारा जीवन पहले से ही काफी जटिल और सीमित नहीं है? और चूंकि हम सबके मस्तिष्क हमारे जीवन के अनुभवों के आधार पर बिलकुल अलग-अलग ढंग से विकसित होते हैं, तो फिर ऐसे में यह उम्मीद ही क्यों करना कि कुछ और नियम हमारे लिए सहायक हो सकते हैं?



लोगों को नियमों में आस्था नहीं होती। यहाँ तक कि बाइबिल में भी, जब एक लंबी अनुपस्थिति के बाद मूसा टेन कमांडमेंट्स की सिल्लियों के साथ पहाड़ की ऊँचाई से वापस आता है, तो देखता है कि ईजराइल के लोगों के बीच दुश्मनी हो गई है। वे सब फरौन के दास रह चुके थे और चार सौ सालों तक उसके अत्याचारी नियम-कानूनों के बंधक रह चुके थे। फिर मूसा ने उन्हें चालीस सालों तक कठोर रेगिस्तान को सहने के लिए विवश किया, ताकि उनके अंदर की दासता खत्म कर उन्हें शुद्ध किया जा सके। आखिरकार मुक्त होने के बाद वे इतने अनियंत्रित और स्वछंद हो चुके थे कि अब उन पर किसी की लगाम नहीं थी। अब वे एक सुनहरे बछड़े की मूर्ति के चारों ओर बेतहाशा नाचते रहते और अपनी शारीरिक भ्रष्टता का खला प्रदर्शन करते।


'मेरे पास एक अच्छी और एक बुरी खबर है,' कानूनविद् (कानून बनानेवाला) ने उन्हें चिल्लाते हुए बताया। 'तुम इनमें से कौन सी खबर पहले सुनना चाहोगे?'

'पहले अच्छी खबर।' सारे सुखवादी चिल्लाए।

'मैंने उसके 15 कमांडमेंट्स (धर्मादेश) की संख्या कम करके 10 करवा दी है।'

'जय हो!' उपद्रवी भीड़ चीखी, 'और बुरी खबर क्या है?'

'व्यभिचार अब भी इसमें शामिल है।' ।


तो नियम फिर भी रहेंगे ही, पर कृपा करके बहुत सारे नियम नहीं होने चाहिए। जब नियम हमारे भले के लिए होते हैं तब भी हमें उनके प्रति झिझक महसूस होती है। अगर हम उत्साही प्रकृति के हैं, अगर हमारे पास चरित्र है, तो नियम हमें उन बंधनों जैसे लगते हैं, जो जीवन में हमारे गौरव और स्वतंत्रता का अपमान करते हैं। दूसरों के नियमों के आधार पर हमारा जीवन क्यों आँका जाए?

और हमारा आँकलन तो हो ही रहा है। आखिरकार, मूसा को ईश्वर ने 'दस सुझाव' नहीं बल्कि धर्मादेश दिए थे। अगर मैं एक स्वतंत्र व्यक्ति हूँ, तो किसी भी धर्मादेश को सुनकर मेरी पहली प्रतिक्रिया यही होगी कि कोई और, यहाँ तक कि ईश्वर भी, मुझे यह नहीं बता सकता कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं।' भले ही उसमें मेरी भलाई हो। पर सुनहरे बछड़े की कहानी हमें याद दिलाती है कि बिना नियमों के हम बहुत जल्द अपने जुनून के गुलाम बन जाते हैं और इसमें मक्ति जैसी कोई बात नहीं है।


यह कहानी कुछ अन्य संकेत भी देती है : जब हम पर कोई बंधन नहीं रह जाता और हम अपने अप्रशिक्षित तरीकों से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं, तो हम जल्द ही उन गुणों की उपासना करने लगते हैं, जो हमारे स्तर से भी निम्न हों। इस मामले में एक कत्रिम पश हमारे अंदर की पाशविक प्रवृत्ति को बिलकुल अनियंत्रित ढंग से सामने ले आता है। यह प्राचीन हिब्रू कहानी स्पष्ट करती है कि हमारे पूर्वज, हमारे मानकों को ऊँचा करने और अवलोकन को गहन बनानेवाले नियमों की अनुपस्थिति में, हमारे सभ्य व्यवहार की संभावनाओं के बारे में क्या महसूस करते थे।


बाइबिल की इस कहानी की एक बात बहुत ही स्पष्ट है कि ये अपने नियमों को किसी वकील, कानून निर्माता


या प्रशासक की तरह सूचीबद्ध नहीं करती। बल्कि यह उन्हें एक ऐसी नाटकीय कहानी से जोड़कर प्रस्तुत करती है, जो इस बात का चित्रण करती है कि हमारे लिए वे नियम क्यों ज़रूरी हैं। इससे हमें उन्हें समझने में आसानी होती है। ठीक इसी तरह प्रोफेसर जॉर्डन पीटरसन ने भी अपने 12 नियमों को यूँ ही सामने नहीं रखा बल्कि उनके साथ कहानियाँ भी सुनाई हैं। जिसके चलते विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उनके ज्ञान को ग्रहण करना हमारे लिए आसान हो जाता है। इस प्रकार वे इस महत्वपूर्ण बात पर प्रकाश डालते हैं कि सबसे सर्वश्रेष्ठ नियम अंतत: हमें बंधनों में बाँधने के बजाय, हमारे लक्ष्य को आसान और हमारे जीवन को अधिक स्वतंत्र व संपूर्ण बनाते हैं।


जॉर्डन पीटरसन से पहली मुलाकात


मैं जॉर्डन पीटरसन से पहली बार 12 सितंबर 2004 को मिला था। यह मुलाकात हमारे दो दोस्तों, टी.वी. निर्माता वोडेक ज़ीमबर्ग और चिकित्सा से जुड़ी एस्टेरा बीकर के घर पर हुई थी। यह वोडेक के जन्मदिन की पार्टी का अवसर था। वोडेक और एस्टेरा, दोनों पोलिश प्रवासी हैं। वे दोनों ही सोवियत साम्राज्य में पले-बढ़े थे, जहाँ कुछ विषय चर्चा के दायरे से बाहर माने जाते थे और कुछ विशेष सामाजिक व्यवस्थाओं व दार्शनिक विचारों पर (इस सूची में तत्कालीन सोवियत शासन भी शामिल है) सामान्य तौर पर सवाल उठाना भी एक बड़ी मुसीबत मोल लेने के बराबर है।



लेकिन ये दोनों ऐसी शानदार पार्टियों के मेजबान थे, जहाँ सहज और ईमानदारी भरी बातचीत होती थी, हर किसी को अपने मन की बात खुलकर कहने की छूट थी और जहाँ हर कोई सामनेवाले की बात को शिष्टाचार पूर्वक सुनता था। यहाँ का नियम था, 'अपने मन की कहो।' और अगर बातचीत राजनीतिक विषयों की ओर मुड़ जाए तो अलग-अलग राजनीतिक झुकाववाले लोग भी सामनेवाले की बात सुनने के लिए जिस प्रकार तैयार रहते थे, वह आजकल काफी दुर्लभ होता जा रहा है।


हालाँकि राजनीति की बातें सुनने के लिए मैं हमेशा तैयार रहता था। कई बार वोडेक के अपने विचार और सच्चाइयाँ अचानक उसके मुँह से बाहर आ जाते थे और साथ ही उसके ठहाके भी। फिर वह उस व्यक्ति को गले लगा लेता, जिसकी बातों पर उसने ठहाका लगाया और उसे अपने मन की बात को और अधिक खुले अंदाज में सामने रखने के लिए उकसाता रहता। यही उन पार्टियों की सबसे अच्छी बात होती थी।


वोडेक की स्पष्टता और उसकी गर्मजोशी पार्टियों को और दिलचस्प बना देती थीं। इसी दौरान एस्टेरा की जिंदादिल आवाज भी श्रोताओं तक पहुँचती रहती थी। लोगों के मुँह से सच्चाइयों का अचानक बाहर आना वहाँ के माहौल की सहजता को कम करने के बजाय अन्य लोगों को अपनी-अपनी सच्चाइयों का विस्फोट करने के लिए उत्साहित करता था। यह हम सबके लिए बड़ा ही मुक्तिभरा अनुभव होता था, जहाँ ठहाकों की कोई कमी नहीं थी



और हम सबकी शाम अधिक दिलचस्प हो जाती थी। क्योंकि वोडेक और एस्टेरा जैसे जिंदादिल और खुले नज़रिएवाले पूर्वी यूरोपीय लोगों के साथ आपको यह स्पष्ट पता होता था कि आप किस प्रकार के लोगों के साथ समय बिता रहे हैं। उनका खला नज़रिया वाकई माहौल में जान डाल देता था।



PDF Download - 12 Rules for Life